आँखों से बह चलें वो आँसू

आँखों से बह चलें वो आँसू ,
न जानें कितनी बातें कह गए।
दिल से आँखों के रस्ते हो निकले।
एक दम चुप चाप ताकि किसी को पता न चलें।

लाख चोटें खाई हैं इस दिल ने
और न जानें कितने ग़म सहे।
क़भी जीत के भी हर गया।
और कभी किसी की ख़ुशी लिए ,
खुद को ही मार गया।
बिन कुछ बोले सब सह गया।
लेक़िन अपनी शिकायतें इन आँखों से कह गया।
अब यह आँखे बोझ से भारी हैं।
हल्का होने की इनकी बारी हैं।
ये बोझ आँखों से आँसू बन कर बह गए

आँखों से बह चलें वो आँसू ,
न जानें कितनी बातें कह गए।
दिल से आँखों के रस्ते हो निकले।
एक दम चुप चाप ताकि किसी को पता न चलें।

किसी ने कुछ नहीं सुना,
या सुन कर अनसुना कर दिया।
लेकिन आँखों ने आँसू झलका कर,
अपने हिस्सें का काम कर दिया।
दोनों सूख चुकें हैं और तैयार हैं।
जिस पल में ख़ुशी बसी हैं बस उस पल का इंतज़ार हैं।

कहीं साथ न छूट जाएँ

काश ये लम्हा अब ठहर जाएँ।
ये पल इतनी जल्दी न गुज़र जाएँ।
इससे पहले की ज़िंदगी रूठ जाएँ।
जीने दो हमें जी भर के,
डर हैं कहीं साथ न छूट जाएँ।

कुछ रिश्तें बनाए जाते हैं।
और कुछ रिश्तें बन जाते हैं।
लेकिन कुछ रिश्तें जिए जाते हैं
इससे पहले की ज़िंदगी रूठ जाएँ।
जीने दो हमें जी भर के,
डर हैं कहीं साथ न छूट जाएँ।

ज़िंदगी में बहुत लोग आते हैं।
कुछ ख़ास लोग दिल को छू जाते हैं ,
और प्यारी से यादें दे जाते हैं।
इससे पहले की ज़िंदगी रूठ जाएँ।
जीने दो हमें जी भर के,
डर हैं कहीं साथ न छूट जाएँ।

आठ पहरों में से वो पहर

आठ पहरों में से वो पहर
जब आवाज़ लगाता हैं,
मेरा दिल उसे महसूस कर
कुछ पल रुक सा जाता हैं।

वो साँझ का ढलता सूरज,
मुझे सब याद दिलाता हैं।
ऐसा लगता हैं मानों,
सब अतीत में चला जाता हैं।
आठ पहरों में से वो पहर
जब आवाज़ लगाता हैं।

धीरे धीरे चलता वो नारंगी गोला,
ग़ायब ही हो जाता हैं।
और इन सब के बीच
ये आसमान न जाने कितने रंग बदल जाता हैं।
आठ पहरों में से वो पहर
जब आवाज़ लगाता हैं।

दिल एक कश्मकश में फँस जाता हैं,
“यूँ होता तो क्या होता… ” यही सोचता रह जाता हैं।
फ़िर आज से समझौता कर,
ग्लानि भाव से शांत जाता हैं।
आठ पहरों में से वो पहर
जब आवाज़ लगाता हैं।

क्या खोया क्या पाया,
सबका हिसाब लगाता हैं।
मुनीम की तरह फ़ायदा या नुकसान,
हर रिश्तें से जोड़ जाता हैं।
आठ पहरों में से वो पहर
जब आवाज़ लगाता हैं।

ये पहर बीतता जाता हैं
और फ़िर अँधेरा छा जाता।
मन घबरा कर बैचैन हो जाता हैं,
क्योंकि उसे भविष्य ऐसा ही नजर आता हैं।
आठ पहरों में से वो पहर
जब आवाज़ लगाता हैं।

अँधेरा जब घना जाता हैं ,
तब मन आशा का एक दीप जलाता हैं।
रौशनी धीमी हैं उसकी लेकिन,
सूरज के आने तक यहीं ढाढ़स बढ़ाता हैं।
आठ पहरों में से वो पहर
अब खत्म जाता हैं।

तुमसे जो मोहब्बत की थी, वो आज भी हैं

तुमसे जो मोहब्बत की थी,
वो आज भी हैं…..
अब भी लबो पे सिर्फ तेरा है नाम,
पर दिल में कुछ सवाल,
आज भी हैं…..
क्यों तूने न थामा मेरा हाथ…..???
क्यों तूने न दिया मेरा साथ……???
तेरे प्यार को न पाने का गम,
आज भी हैं…..
तेरे बिना मन मानता नहीं है मेरा…..
ख़्वाबों में अब भी चेहरा है तेरा…..
तेरे लिए जो ख़त लिखें थे,
वो आज भी हैं…..
तेरे बिना कैसे ज़िंदा हुँ पता नहीं…..
तेरे सिवा किसी और से इश्क़ हुआ नहीं…..
तेरे लिए जो बेचैनी थी,
आज भी हैं…..
तेरे ही आने का इंतज़ार है अब…..
ज़िंदगी में बस तेरा ही प्यार है अब…..
तेरी एक झलक देखने का वो पागलपन
आज भी है……
कहाँ है तू और किस दुनिया में, पता नहीं…..
लेकिन तेरे बिना मेरा मन किसी दुनिया में लगता नहीं …..
तेरे लिए सब कुछ छोड़ने का वो इरादा,
आज भी हैं…..
तुमसे जो मोहब्बत की थी,
वो आज भी हैं …..

बेटियाँ

इन कोमल कोपलो को उगने दो,
इन्हे भी दुनिया देखने दो ज़रा|
मत लगाओ  इन पर बंदिशे और पाबंदिया,
इन्हे भी ज़िंदगी जी लेने दो ज़रा|

ये भी ऊँचे आसमान मे उडेगी ,
पंख तो इनके खुलने दो ज़रा|
ये भी तुम्हारा नाम रोशन करेगी ,
आगे इन्हे बढ़ने दो ज़रा|

मत बधो इन्हे रीतिओ की बेड़ियो से,
ये ज़ंज़ीरे इनकी खोलो तो ज़रा|
इनकी ज्वाला भी भड़क उठेगी ,
एक चिंगारी पास लाओ तो ज़रा|

मत समझो बोझ इन्हे,
इनको सीने से लगाओ तो ज़रा|
मत मारो इन बचपन मे ,
इन्हे भी ज़िंदगी जी लेने दो ज़रा|

देवी इन्हे कहते हो पर,
सच्चे दिल से पूजो तो ज़रा|
ये ही तुम्हारी लाज बचाएगी,
तुम भी इनकी इज़्ज़त करो तो ज़रा|

कौन कहता है ये वंश नही बढ़ती ,
एक बार ज़िम्मेदारी सौंप कर देखो तो ज़रा|
तुम्हे भी हंस जीना सीखा देगी,
इन्हे भी ज़िंदगी जी लेने दो ज़रा|

हैलो वर्ल्ड!

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