तेरी बातें

वो तेरी बातों को मैं याद करता हूँ ,
इन कानों में धीऱे से कुछ कह जाती हैं।
वो तेरी नादानियाँ पहले हँसती हैं ,
फ़िर आँखों से आँसू बन बह जाती हैं।

वो तेरे नग़मे दिन भर गुनगुनाया करता हूँ ,
और ये नज़्मे तेरी दिल में बस जाती हैं।
वो तेरी तसवीरे फ़िर से सारी कहानी दोहराती हैं ,
न चाह कर भी अतीत में ले जाती हैं।

वो तेरे जानें का ग़म दिल से मिटने की कोशिश करता हूँ ,
लेक़िन ये ग़ुस्ताख़ दिल कुछ मानता ही नहीं हैं।
इसे बार बार समझाता हूँ की तू जा चुकी हैं ,
लेकिन तू हैं जो इस दिल से नहीं जाती हैं।